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October 17, 2026
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देवभूमि में मिशन ‘हैट्रिक’: विधायक जी… आपका रिपोर्ट कार्ड ठीक नहीं है, सोशल मीडिया पर उड़ने लगीं टिकट कटने की हवाएं!

देवभूमि में मिशन ‘हैट्रिक’: विधायक जी… आपका रिपोर्ट कार्ड ठीक नहीं है, सोशल मीडिया पर उड़ने लगीं टिकट कटने की हवाएं!

  • देहरादून-देवभूमि की सियासत में आजकल पहाड़ों से लेकर मैदान तक एक ही चर्चा शुरू होने लगी है वजह साफ़ है क्या इस बार बीजेपी उत्तराखंड में जीत की ‘हैट्रिक’ लगाने के लिए अपने ही कई दिग्गजों और सुस्त विधायकों का पत्ता साफ करने वाली है? सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर अभी से उन माननीयों की लिस्ट वायरल होने लगी है, जिन्हें पार्टी के ‘डेंजर जोन’ में बताया जा रहा है।

उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों सहित सोशल मीडिया में कयासों सहित व्हाट्सएप ग्रुप में इन दिनों एक गुप्त चर्चा तेजी से तैर रही है। वायरल पोस्टों के मुताबिक पार्टी इस बार एंटी-इन्कम्बेंसी (सत्ता विरोधी रुझान) या किसी भी तरह के क्षेत्रीय असंतोष का जोखिम उठाने के बिल्कुल मूड में नहीं है।सूत्रों की मानें तो संगठन स्तर पर लगातार गोपनीय सर्वे कराए जा रहे हैं, जिसमें उन विधायकों की कुंडली खंगाली जा रही है जो पिछले कुछ सालों में जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे। साथ ही जनता के बीच घटती पैठ कार्यकर्ताओं की अनदेखी और केवल कागजी विकास कार्यों ने कई वर्तमान विधायकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर इन माननीयों के टिकट कटने की भविष्यवाणियां धड़ल्ले से शेयर हो रही हैं।

पार्टी के भीतर से छनकर आ रही अंदरूनी खबरों के अनुसार बीजेपी प्रदेश में जीत की हैट्रिक लगाने के लिए किसी प्रकार से कोई रिस्क भी लेना चाहती लिहाजा सभी विधायकों का परफॉर्मेंस कार्ड बनाने की प्रक्रिया भी लगातार जारी है नो रिस्क फार्मूले के तहत खासकर सदन की बयानबाजी या बड़े दावों से ज्यादा तवज्जो इस बात को दी जा रही है कि क्षेत्र की जनता विधायक के कामकाज से कितनी संतुष्ट है।सूत्रों के मुताबिक पार्टी हाईकमान का साफ संदेश है कि जो नेता जनता के बीच एक्टिव नहीं हैं या जिनकी निष्क्रियता साफ दिख रही है, उनकी जगह नए और एनर्जेटिक चेहरों को मौका दिया जा सकता है।हालांकि टिकट वितरण में बड़े आकाओं की कितनी चलेगी ये आने वाला समय हो बताएगा लेकिन कुल मिलाकर पैमाना सिर्फ और सिर्फ एक ही होगा—’जिताऊ और टिकाऊ उम्मीदवार’।

विधायकों की बढ़ी धड़कनें, रातों-रात शुरू हुआ एक्टिविज्म

सोशल मीडिया पर चल रही इन अटकलों और वायरल सूचियों ने कई मौजूदा विधायकों की रातों की नींद उड़ा दी है। जो माननीय पिछले कई महीनों से अपने निर्वाचन क्षेत्रों से गायब चल रहे थे या जनता की पहुंच से दूर थे, वे अचानक एक्टिव मोड में आ गए हैं। रातों-रात उद्घाटन, जनता के बीच चौपाल और कार्यकर्ताओं को मनाने का दौर तेजी से शुरू हो चुका है।
हालाँकि, इन वायरल सूचियों में कितनी सच्चाई है और कितने दावे खोखले साबित होंगे, यह तो वक्त ही बताएगा। लेकिन इतना तय है कि इस ‘नो-रिस्क’ सियासत ने टिकट के दूसरे दावेदार और विरोधी खेमों में नई जान जरूर फूंक दी है। तब तक के लिए देवभूमि की इस दिलचस्प राजनीतिक हलचल पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं!

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