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August 18, 2026
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107 सचिवों की फ़ौज में आख़िर क्यों बेगाने हुए घनसाली के पूर्व विधायक भीमलाल आर्य?

कांग्रेस के “महाग्रंथ’ में क्यों चूक गए भीमलाल ,या दलबदल का इतिहास बना वजह ?

107 सचिवों की फौज में आखिर क्यों बेगाने हुए घनसाली के पूर्व विधायक भीमलाल आर्य?

उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने अपनी नई कार्यकारिणी की जो भारी-भरकम सूची जारी की उसे अगर कोई साधारण लिस्ट समझे तो यह उसकी सबसे बड़ी नादानी होगी। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल के हस्ताक्षरों से जारी यह लिस्ट दरअसल एक ‘राजनीतिक महाग्रंथ’ है।जो की आने वाले चुनावों में कांग्रेस की नैया पार लगाने की तैयारी में जुट गई है
1 कोषाध्यक्ष, 24 उपाध्यक्ष, 36 प्रदेश महामंत्री और पूरे 107 सचिवों का इतना विशाल अमला तैयार किया गया है देखकर लगता है मानो कार्यकर्ताओं से ज्यादा तो अब संगठन में ओहदेदार ही घूम रहे हैं!

वावजूद घनसाली से भीमलाल आर्य का ‘पत्ता साफ़’

लेकिन इस राजनीतिक ‘महाग्रंथ’ को अगर आप सिर से पैर तक खंगालेंगे, तो एक बहुत बड़ा सन्नाटा सुनाई देगा। घनसाली विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक भीमलाल आर्य का नाम इस पूरी सूची से नदारद है।
अब सवाल उठता है कि इतने बड़े कुनबे में भी आर्य साहब को जगह क्यों नहीं मिली?
राजनीतिक गलियारों में इसका जवाब बिल्कुल साफ है—दलबदल की कला में महारत!
मौसम की तरह वफादारी बदलने वाले नेताओं के लिए क्या चुनावी साल में कांग्रेस के दरवाजे कसकर बंद हो चुके हैं?”अगर ऐसा है तो बाकी के नामों की इतनी लंबी लिस्ट क्यों ।
ऐन वक्त पर पाला बदलने और सियासत की बहती हवा को देखकर रंग बदलने के हुनर में भीमलाल आर्य को उस्ताद माना जाता है। मानें भी क्यों नहीं प्रचंड वोटों से चुनाव जीतने वाले भीमलाल ने चंद दिनों में गडकरी के नाम पत्र भेजकर खुला संदेश दे ही दिया था लेकिन चुनावी साल में ऐसे ‘मौसम वैज्ञानिकों’ पर भरोसा करना किसी भी दल के लिए खतरे से खाली नहीं होता जिसका आज उदाहरण कांग्रेस के इस ग्रंथ में दिखाई दे रहा है
शायद यही वजह है कि कांग्रेस आलाकमान ने 100 से भी ज्यादा नेताओं की इस फौज में दलबदल के इस माहिर खिलाड़ी को किनारे रखना ही अपनी सेहत के लिए बेहतर समझा।
अब देखना यह होगा कि इस ‘महाग्रंथ’ से बेदखल होने के बाद आर्य साहब राजनीति का अगला कौन सा पैंतरा कब बदलते हैं!

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