धराली आपदा को बीता एक साल: मलबे में अभी भी दबा कल्प केदार मंदिर साथ ही सुरक्षा के इंतजाम अब भी अधूरे; आख़िर कैसे और कब पटरी पर लोटेगी जिंदगी
5 अगस्त की तबाही के जख्मों के बीच किसान नकदी फसलों की ओर मुड़े आपदा में 115 मकान और 116 होटल/दुकानें पूरी तरह ध्वस्त हो गए थे

21 परिवारों के पुनर्वास के लिए सर्वे की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है।
तेलगाड में बनी कृत्रिम झील और खीर गंगा नदी का उफान अभी भी बना हुआ है क्षेत्र के लिए बड़ा खतरा।
बीते वर्ष 5 अगस्त को उत्तरकाशी के धराली में आई विनाशकारी आपदा को एक साल पूरा हो चुका है। तबाही के उस खौफनाक मंजर के जख्म आज भी स्थानीय लोगों के दिलों में हरे हैं। अपनों को खोने और बेघर होने के दर्द के बीच, धराली के लोग अब धीरे-धीरे अपनी जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं।

आजीविका के नए रास्ते: खेती और ट्रैकिंग को बनाया सहारा
आपदा में रोजगार के साधन छिन जाने के बाद भी स्थानीय ग्रामीणों ने हिम्मत नहीं हारी है। यहाँ के किसान अब पारंपरिक खेती छोड़ नकदी फसलों (Cash Crops) की ओर रुख कर रहे हैं। वहीं, क्षेत्र की युवतियों और युवाओं ने स्वरोजगार को बढ़ावा देते हुए ट्रैकिंग और ट्रेवल गाइड व्यवसाय को अपनी आजीविका का जरिया चुना है।
एक साल बाद भी सुरक्षा इंतजाम अधूरे, ग्रामीणों में आक्रोश
जमीन पर राहत और बचाव कार्यों के दावों के बीच सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने से स्थानीय लोगों में नाराजगी है।
कल्प केदार मंदिर मलबे में दफन: 5 अगस्त की आपदा में ऐतिहासिक कल्प केदार मंदिर लगभग 25 फीट मलबे के नीचे दब गया था, जिसे एक साल बाद भी बाहर नहीं निकाला जा सका है।
झील और नदी से खतरा: तेलगाड में मलबे के कारण बनी कृत्रिम झील और खीर गंगा नदी का उफान आज भी धराली और आसपास के गांवों के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है।

आपदा विभाग को वाडिया संस्थान की रिपोर्ट का इंतजार
आपदा प्रबंधन विभाग की संयुक्त टीम की अंतिम वैज्ञानिक रिपोर्ट आना अभी बाकी है। हालांकि, वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान की शुरुआती रिपोर्ट में ऊपरी क्षेत्रों में लगातार हुई भारी बारिश और मलबे के तीव्र बहाव को इस आपदा का मुख्य कारण माना गया था।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, 21 परिवारों के पुनर्वास का सर्वे पूरा कर लिया गया है तथा तटबंध निर्माण व सुरक्षा दीवार बनाने की योजना को मंजूरी दे दी गई है, जिस पर जल्द ही काम शुरू किया जाएगा।
धराली आपदा @ 1 Year: 5 अगस्त को आई उस तबाही के एक साल बाद कैसा है धराली का हाल?
एक तरफ जहाँ कल्प केदार मंदिर आज भी 25 फीट मलबे के नीचे दबा है और सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों का इंतजार है, वहीं दूसरी तरफ धराली के हौसले पस्त नहीं हुए हैं। किसान नकदी फसलों और युवा ट्रैकिंग के जरिए अपनी जिंदगी को फिर से संवार रहे हैं।
नोट,सभी फाइल फोटो हैं
