उत्तराखंड में मानसून का तांडव: अगले 48 घंटे बेहद भारी, रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी
उत्तराखंड में मौसम ने अपना विकराल रूप दिखाना शुरू कर दिया है। मौसम विभाग देहरादून के अनुसार, राज्य में 11 जुलाई तक सक्रिय से लेकर बेहद प्रबल मानसूनी गतिविधियां देखने को मिलेंगी। विशेषकर आज यानी 9 जुलाई और कल 10 जुलाई को बारिश अपनी चरम सीमा पर होगी, जिसके चलते शासन और प्रशासन को पूरी तरह मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश और उससे सटे दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश के ऊपर एक सुस्पष्ट कम दबाव का क्षेत्र (Well-Marked Low Pressure Area) बना हुआ है। इसके साथ ही एक मजबूत चक्रवातीय परिसंचरण (Cyclonic Circulation) समुद्र तल से 9.6 किलोमीटर ऊपर तक फैला है। इसके अलावा, एक पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) भी सक्रिय है। इन सभी मौसम प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव के कारण उत्तराखंड के आसमान में भारी जल-वाष्प और घने बादल उमड़ रहे हैं, जो भारी तबाही की वजह बन सकते हैं।
मौसम विभाग ने आज के लिए देहरादून, टिहरी, पौड़ी, हरिद्वार, नैनीताल, ऊधमसिंह नगर और चम्पावत जिलों में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश होने की प्रबल संभावना जताई है। इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने और बौछारों के अति तीव्र से अत्यंत तीव्र होने की चेतावनी (ऑरेंज अलर्ट) दी गई है। वहीं उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, अल्मोड़ा, बागेश्वर और पिथौरागढ़ के लिए ‘वॉच’ (येलो अलर्ट) जारी किया गया है।
कल 10 जुलाई को भी राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। पौड़ी, नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, चम्पावत और बागेश्वर जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया गया है। इसके अलावा देहरादून, टिहरी, हरिद्वार, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ में भी भारी बारिश और बिजली चमकने की चेतावनी दी गई है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 11 जुलाई से मानसूनी गतिविधियों में थोड़ी कमी आ सकती है। हालांकि, गढ़वाल क्षेत्र के अनेक स्थानों और कुमाऊं क्षेत्र के अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा और गरज के साथ बौछारें पड़ने का सिलसिला जारी रहेगा।
प्रशासन की अपील: सतर्क रहें, यात्रा से बचें
मौसम के इस बदले मिजाज को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने नदी-नालों के किनारे रहने वाले लोगों और पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वाले पर्यटकों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। भूस्खलन (Landslide) की संवेदनशीलता को देखते हुए पर्वतीय मार्गों पर रात के समय यात्रा न करने की सलाह दी गई है।
