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November 8, 2026
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गूँज बनाम शोर: राहुल के ‘छात्रों की गूँज ‘ के सामने सरकार ने क्यों उतारा ‘नाच-गाना’?


गूँज बनाम शोर: राहुल के ‘छात्रों की गूँज ‘ के सामने सरकार ने क्यों उतारा ‘नाच-गाना’?

कल उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की शाम दो बेहद विपरीत ध्रुवों की गवाह बनी। जहाँ एक तरफ देश के प्रमुख विपक्षी नेता राहुल गांधी युवाओं और छात्रों के साथ ‘छात्रों की गूँज’ कार्यक्रम में सीधे संवाद कर रहे थे, तो दूसरी तरफ ठीक उसी वक्त महज कुछ दूरी पर स्थित परेड ग्राउंड में सरकार के संरक्षण में पंजाबी सिंगर जैस्मिन सैंडलस का एक भव्य म्यूजिकल शो चल रहा था। ऐसा भी नहीं है कि परेड ग्राउंड या देहरादून में इस तरह के भव्य शो आयोजित न हुए हों लेकिन कल शाम हुए आयोजित शो की टाइमिंग पर सवाल उठना लाज़मी है सरकार ने भले ही यह शो आनन फानन में एक सोची-समझी रक्षात्मक रणनीति के रूप मे करवाया हो लेकिन इसका संदेश स्पष्ट था। एक ही दिन और एक ही समय पर मनोरंजन के इतने बड़े कार्यक्रम का आयोजन महज कोई इत्तेफाक नहीं बल्कि विपक्षी संवाद की धार को कुंद करने और युवाओं की भीड़ को डायवर्ट करने की एक प्रशासनिक कोशिश थी। जिसमे वह काफ़ी हद तक कामयाब भी रही वजह स्पष्ट है की लंबे समय से बेरोजगारी और पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों पर घिरी सरकार ने युवाओं के आक्रोश से बचने के लिए संगीत का सहारा लिया लेकिन टाइमिंग की इस घबराहट ने सरकार की कमजोरी को ही जगजाहिर कर दिया।राहुल गांधी के इस कार्यक्रम ‘छात्रों की गूँज’ में मौजूद छात्रों ने सीधे और बेहद तीखे सवाल उठाए। पेपर लीक का दंश झेल रहे युवाओं ने जब अपनी व्यथा राहुल गांधी के सामने रखी तो वहां कोई शोर नहीं बल्कि एक गंभीर सन्नाटा और समाधान की तलाश थी।उसी के विपरीत शहर के बीचोंबीच परेड ग्राउंड में सरकार के सांस्कृतिक और म्यूजिकल शो में केवल तड़क-भड़क और तेज़ संगीत का माहौल था। ऐसे में यह सवाल ज़रूर उठता है की जब कोई सरकार अपने राज्य के युवाओं के वास्तविक और सुलगते सवालों का जवाब देने में असमर्थ महसूस करती है, तो वह अक्सर इसी तरह के भारी-भरकम इवेंट्स का सहारा लेती है ताकि माहौल को ही डायवर्ट किया जाए। लेकिन अब आम जनमानस में यह चर्चा आम है कि क्या सरकार राहुल गांधी के छात्रों की गूँज कार्यक्रम में युवाओं के रोजगार और हक की बात से इतना डर गई थी कि उसने कार्यक्रम के समानांतर पहले ही नाच-गाने का प्रोग्राम खड़ा कर दिया ? उत्तराखंड का युवा रील्स और संगीत को पसंद जरूर कर सकता है, लेकिन जब बात उसके भविष्य, करियर और सम्मान की आती है, तो वह ‘सुर’ और ‘शोर’ के बीच का अंतर बखूबी समझता है।जिसका नजारा कल बन्नू ग्राउंड और परेड ग्राउंड में देखने को भी मिला

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